Hindi Varnamala chart: हिंदी वर्णमाला PDF | Hindi Varnamala PDF download | हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन

On: May 2, 2026 1:02 PM
Follow Us:

हिंदी भाषा को पढ़ने, लिखने और समझने की नींव “हिंदी वर्णमाला” (Hindi Varnamala) है। किसी भी भाषा की अभिव्यक्ति ध्वनियों के माध्यम से होती है, और ध्वनियों को लिखित रूप देने वाले प्रतीकों को वर्ण कहते हैं। अक्षरों के इस क्रमबद्ध समूह को ही वर्णमाला कहते हैं, और इसे सीखना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो हिंदी में पारंगत होना चाहता है।

इस लेख में हम हिंदी वर्णमाला से जुड़ी हर बात को सरल और व्यवस्थित रूप में आपके सामने रखेंगे। आप इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें, क्योंकि यहाँ हमने स्वर और व्यंजनों की परिभाषा, वर्गीकरण, उच्चारण स्थान, बारहखड़ी और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों को विस्तार से समझाया है।

हिंदी वर्णमाला क्या है? (What is Hindi Varnamala?)

हिंदी वर्णमाला, हिंदी भाषा के उन सभी मूल ध्वनि-चिह्नों का वह समूह है, जिन्हें निश्चित और क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित किया गया है। सरल शब्दों में कहें तो हिंदी के सभी अक्षरों (letters) के संग्रह को हिंदी वर्णमाला कहते हैं। हिंदी परंपरा के अनुसार, वर्णमाला में पहले स्वर वर्ण और उसके बाद व्यंजन वर्ण लिखे जाते हैं।

हिंदी वर्णमाला में वर्णों की कुल संख्या को लेकर कई मत हैं, लेकिन आम तौर पर इसे 52 वर्णों का समूह माना जाता है। हाल ही में, केन्द्रीय हिंदी समिति द्वारा ‘ळ’ (मूर्धन्य ‘ल’) को आधिकारिक रूप से शामिल किए जाने के बाद वर्णों की संख्या 53 हो गई है।

हिंदी वर्णमाला के प्रकार (Types of Hindi Varnamala)

हिंदी व्याकरण के अनुसार, हिंदी वर्णमाला को मुख्य रूप से दो बड़े भागों में बाँटा गया है: स्वर (Vowels) और व्यंजन (Consonants)। आइए, इन दोनों को विस्तार से समझते हैं:

1. स्वर वर्ण (Swar Varn – Vowels)

जिन वर्णों के उच्चारण के लिए किसी अन्य वर्ण की सहायता की आवश्यकता नहीं होती, वे स्वर कहलाते हैं। स्वरों का उच्चारण पूर्ण साँस के साथ, बिना किसी अवरोध के, मुख से स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है।

See also  Allahabad High Court RO / ARO / CA Recruitment 2026: Vacancy, Eligibility, Salary, Apply Online और Big Update

हिंदी में स्वरों की कुल संख्या 11 (ग्यारह) है। स्वरों की एक तालिका इस प्रकार है:

हिंदी वर्णमाला के स्वर

स्वर वर्ण स्वर चिह्न (मात्रा) उच्चारण उदाहरण स्वर वर्ण स्वर चिह्न (मात्रा) उच्चारण उदाहरण
(मात्रा नहीं) लम गज
ि लक
ड़िया
क्ष
लाश
कर

उपरोक्त तालिका में स्वरों की मात्राओं को शब्दों में उनकी स्थिति के अनुसार दिखाया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हिंदी वर्णमाला में ‘ऋ’, ‘ऌ’ और ‘ॡ’ स्वरों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि ये संस्कृत से आए हैं और इनका प्रयोग सीमित है।

2. व्यंजन वर्ण (Vyanjan Varn – Consonants)

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं किया जा सकता, वे व्यंजन कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो व्यंजनों के उच्चारण के लिए स्वरों का सहारा लेना पड़ता है। उदाहरण के लिए, ‘क’ व्यंजन का उच्चारण ‘क् + अ’ से होता है।

हिंदी वर्णमाला में व्यंजनों की संख्या 33 (तैंतीस) है। इन 33 व्यंजनों को उच्चारण स्थानों के आधार पर पाँच वर्गों (क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग, प-वर्ग) में विभाजित किया गया है। साथ ही, कुछ अन्य प्रकार के व्यंजन भी होते हैं।

व्यंजन वर्गीकरण तालिका

वर्ग स्पर्शी व्यंजन (अघोष-अल्पप्राण) (अघोष-महाप्राण) (घोष-अल्पप्राण) (घोष-महाप्राण) अनुनासिक (नासिक्य)
क-वर्ग (कण्ठ्य) क (ka) ख (kha) ग (ga) घ (gha) ङ (nga)
च-वर्ग (तालव्य) च (cha) छ (chha) ज (ja) झ (jha) ञ (nya)
ट-वर्ग (मूर्धन्य) ट (ṭa) ठ (ṭha) ड (ḍa) ढ (ḍha) ण (ṇa)
त-वर्ग (दन्त्य) त (ta) थ (tha) द (da) ध (dha) न (na)
प-वर्ग (ओष्ठ्य) प (pa) फ (pha) ब (ba) भ (bha) म (ma)
See also  यूपीटीईटी (UPTET) 2026 पूर्ण पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न | UP TET Syllabus in Hindi | यूपीटीईटी का सिलेबस 2026

नोट: ये 25 स्पर्श व्यंजन हैं। इनसे इतर, अन्तःस्थ व्यंजन: य, र, ल, व और उष्म व्यंजन: श, ष, स, ह होते हैं। इसके अलावा संयुक्त व्यंजन: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र और द्विगुण/उत्क्षिप्त व्यंजन: ड़, ढ़ हैं।

अयोगवाह वर्ण (Ayogvah Varn)

स्वर और व्यंजन से भिन्न, दो ऐसे वर्ण हैं जिन्हें अयोगवाह कहा जाता है क्योंकि ये न तो पूर्ण रूप से स्वर हैं और न ही व्यंजन, फिर भी इनका प्रयोग किया जाता है:

  • अनुस्वार (ं) – अं: यह मुख्यतः व्यंजनों के साथ लगता है और नासिका ध्वनि उत्पन्न करता है, जैसे ‘कंकण’, ‘गंगा’।

  • विसर्ग (ः) – अः: यह स्वर के बाद आता है और उच्चारण में ‘ह’ की ध्वनि जैसा होता है, जैसे ‘दुःख’।

उच्चारण स्थान (Place of Articulation)

हिंदी व्याकरण में वर्णों के सही उच्चारण के लिए मुख के उन स्थानों को समझना बहुत जरूरी है, जहाँ से वे ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। हिंदी वर्णमाला के वर्णों के प्रमुख उच्चारण स्थान और उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • कंठ्य (Kanthya): कंठ (गले) से उच्चरित। अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह।

  • तालव्य (Talavya): तालु (मुँह के ऊपरी भाग) से उच्चरित। इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श।

  • मूर्धन्य (Murdhanya): मूर्धा (जीभ का पिछला भाग तालु से टकराकर) से उच्चरित। ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष, ळ (विशिष्ट)।

  • दन्त्य (Dantya): दाँतों से उच्चरित। ल, स, त, थ, द, ध, न।

  • ओष्ठ्य (Oshthya): ओष्ठों (होंठों) से उच्चरित। उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म।

  • दन्तोष्ठ्य (Dantoshthya): दाँतों और होंठों के स्पर्श से उच्चरित। व。

  • अनुनासिक (Anunasika): मुँह के साथ नाक से भी हवा निकलती है। ङ, ञ, ण, न, म।

बारहखड़ी (Barakhadi) क्या है?

बारहखड़ी वर्णमाला का विस्तार है, जहाँ प्रत्येक व्यंजन में सभी स्वरों की मात्राएँ लगाकर उच्चारण और लेखन का अभ्यास किया जाता है। उदाहरण के लिए, ‘क’ व्यंजन से बारहखड़ी बनती है: क, का, कि, की, कु, कू, के, कै, को, कौ, कं, कः। यह शुद्ध उच्चारण और भाषा को लिखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

See also  CISF ASI Paramedical Staff Recruitment 2026: 24 Posts Notification Out, Online Apply Start

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हिंदी वर्णमाला में कुल कितने स्वर होते हैं?
हिंदी वर्णमाला में कुल 11 (ग्यारह) स्वर होते हैं – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। ऋ, ऌ और ॡ स्वरों को हिंदी में शामिल नहीं माना जाता, हालाँकि इनका प्रयोग होता है。

2. हिंदी में कुल कितने व्यंजन हैं?
हिंदी वर्णमाला में 33 (तैंतीस) व्यंजन माने जाते हैं, जिन्हें आगे 25 स्पर्श व्यंजन (क से म तक) और 8 अन्तःस्थ एवं उष्म व्यंजनों में बाँटा जाता है।

3. ‘अयोगवाह’ किसे कहते हैं?
स्वर और व्यंजन से भिन्न, अनुस्वार (अं) और विसर्ग (अः) को ‘अयोगवाह’ वर्ण कहा जाता है।

4. स्पर्श व्यंजन कितने होते हैं और कौन-कौन से हैं?
स्पर्श व्यंजन 25 होते हैं – क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म।

5. स्वर और व्यंजन में क्या अंतर है?
स्वर वे वर्ण हैं, जिनका उच्चारण बिना किसी सहायता के, स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। इसके विपरीत, व्यंजनों का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष

हिंदी वर्णमाला हिंदी भाषा की आत्मा है। इसके बिना न तो शब्दों का निर्माण संभव है और न ही वाक्यों और साहित्य की कल्पना。वर्णों के सही ज्ञान और लेखन अभ्यास द्वारा ही हम भाषा पर पकड़ मजबूत कर सकते हैं。वर्णमाला का यह व्यवस्थित ज्ञान आपको केवल पढ़ने और लिखने में ही सहायक नहीं होगा, बल्कि उच्चारण को भी निखारेगा।

Ashish Pandey

मेरा नाम आशीष पांडे है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।